Friday, September 18, 2020

कोई - कोई


अच्छे फूल को देख हर कोई तोड़ लेता है,

उसे सींचता है कोई-कोई।

प्यार से हर कोई फूल को सहलाता है,

कांटे को छूता है कोई-कोई।


प्यार , इश्क़, मोहब्बत ज़िन्दगी का एक हिस्सा है,

इससे खुद को बचा पाता है कोई-कोई। 

खाते हैं कसमे साथ जीने-मरने की,

पर निभा पाता है कोई-कोई।


सोते हुए हर कोई ख्वाब देख लेता है,

उसे पूरा करने के लिए जागता है कोई-कोई। 

पत्थर की चोट खाकर गिर जाता है हर इंसान,

खुद को संभाल पाता है कोई-कोई।


मंजिल तो मिल जाएगी, बस थोड़ा और चलना बांकी है,

ऐसी तसल्ली दिला पाता है कोई-कोई।

एक, बस एक ख्वाब टूटने से खत्म नही होती ज़िन्दगी,

हालात-ए-वक़्त में नई ख्वाब सजाता है कोई-कोई।


                                    ~ मतवाला-जी

कोई - कोई

अच्छे फूल को देख हर कोई तोड़ लेता है, उसे सींचता है कोई-कोई। प्यार से हर कोई फूल को सहलाता है, कांटे को छूता है कोई-कोई। प्यार , इश्क़, मोहब्ब...